केंद्र से पर्याप्त अनुदान नहीं
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
केंद्र सरकार से पर्याप्त राजस्व घाटा अनुदान आता न देख हिमाचल सरकार को अगले बजट के लिए वार्षिक परिव्यय को घटाना पड़ा है। चालू वित्त वर्ष से इस परिव्यय का आकार 2354.61 करोड़ कम रखना पड़ा है।
केंद्र से अगले बजट के लिए चालू वित्त वर्ष से करीब 3000 करोड़ रुपये कम राजस्व घाटा अनुदान आ रहा है। इसलिए बजट के घाटे को पाटने के लिए ऐसा करना पड़ा है। बजट में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है। अगर ऐसा नहीं किया जाता यह घाटा और भी बढ़ जाता, जो 3 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। राजकोषीय घाटे की पूर्ति के लिए जीडीपी का 3 फीसदी कर्ज ही लिया जा सकता है। इसके अधिक की भारत सरकार मंजूरी नहीं देती है।वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सरकार की वार्षिक योजना का आकार यानी वार्षिक परिव्यय 9989.49 करोड़ रुपये था।
यह आमतौर पर अगले वित्त में बढ़ता रहा है, मगर अगले बजट के लिए इसे घटाने की नौबत आई है। यानी इसे 7634.88 करोड़ रुपये ही तय करना पड़ा है। बजट दस्तावेजों में इस पर स्थिति स्पष्ट की गई है। सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक मामलों का कल्याण और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 1618.27 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसमें सबसे अधिक बजट सड़क, परिवहन, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन के लिए 1522.45 करोड़ रुपये रखा गया है। विद्युत के लिए 838.72 और स्वास्थ्य व आयुर्वेद के लिए 490.69 तय किया गया है।
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