संचालकों के हित में जरूरी बदलाव करने को कहा
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्यटन विभाग को होम स्टे संचालकों के हित में होम स्टे रूल्स 2025 को नए सिरे से तय करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के लिए होम स्टे चलाने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों में आवश्यक बदलाव करने को कहा है। पर्यटन विभाग को होम स्टे संचालकों से मिल रहे सुझावों को स्टडी करने के बाद उन्हें रूल्स में शामिल करने के निर्देश दिए हैं, जिससे उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। पर्यटन विभाग होम स्टे नियमों में बदलाव करने जा रहा है, जिसके लिए ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की गई है। इन नियमों को लेकर सरकार ने सभी पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां 15 दिन के भीतर मांगे हैं।नए नियमों पर पर्यटन विभाग को 300 से अधिक सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को इन सुझावों का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ कहा है कि नए नियम बनाते हुए संचालकों और इससे जुड़े सभी पक्षों को सुना जाए और उनपर गंभीरता से विचार करने के बाद ही आगे बढ़ा जाए। उधर, पर्यटन विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार होम स्टे रूल्स 2025 के ड्राफ्ट को लेकर मुख्य तौर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक समान मानकों पर आपत्ति जताई गई है। शहरी क्षेत्रों विशेषकर पर्यटन स्थलों और आसपास के इलाकों में पर्यटन कारोबारी होटलों की तर्ज पर बेड एंड ब्रेकफास्ट और होम स्टे संचालित कर रहे हैं, जबकि पंचायतों के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के लिए होम स्टे चलाए जा रहे हैं।
होम स्टे पंजीकरण और नवीनीकरण शुल्क में पंचायती क्षेत्रों के लिए 50 फीसदी छूट दी जानी चाहिए, घरेलू दरों पर बिजली-पानी, जीएसटी नंबर की अनिवार्यता लागू न हो, नगर निगम और नगर परिषद से बाहर पंचायती क्षेत्रों के एनएच और फोरलेन के किनारे 50 मीटर क्षेत्र को शहरी क्षेत्र की श्रेणी में न रखा जाए और भवन संरचना स्थिरता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता खत्म करने का सुझाव दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में चलाए जा रहे बेड एंड ब्रेकफास्ट और होम स्टे संचालकों ने 8,000 से 12,000 रुपये पंजीकरण शुल्क और महज एक साल की वैधता अवधि पर भी आपत्ति जताई है।
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